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संदेश

पिस्टल मैन

 टीपू   - अपने गांव का सबसे अच्छा लड़का था ! वह अपने निश्चल स्वभाव से , सभी ग्राम वासियों को सम्मोहित कर लिया था ! अपने पूर्वजों द्वारा मिले संपत्ति के नाम पर, एक घर के अलावा उसके पास और कुछ भी नहीं था ! उसका व्यक्तित्व इतना अच्छा था ,की न कुछ होते हुए भी उसके शादी में ढेर सारा सामान मिला था ! सबसे अचंभे की बात तो तब हुई ,जब शादी के एक साल बीतने के बाद ,उसके पत्नी के मामा  बुलेट गाड़ी देने आए !  टीपू - कभी सपने में भी नहीं सोचा था , कि ऐसा होगा ! मामा को बढ़िया से स्वागत किया गया ! छः घंटे में चार दफा चाय तरह-तरह के पकवान बनारसी पान इत्यादि ! मामा -टीपू के पिताजी से विदा लेने का निवेदन  किये लेकिन असफल रहे ! काफी विनती के बाद शाम के समय जाने का अनुमति मिला ! शाम का समय  सूर्यास्त होने में कुछ ही पल बाकी थे ! गांव में लगे सोलर लाइट की लाल इंडिकेटर, साफ नजर आ रहा था ! किसी किसी घरों से कुकर की सीटी स्टीम इंजन की तरह आवाज कर रही थी ! टीपू - मामा को बुलेट पर बैठाकर रंगबाज की तरह, फटफटाते  हुए बस स्टैंड की तरफ छोड़ने चला ! गांव से बस स्टैंड की दूरी लगभग तीस...

अपने हुए बेगाने !

  लेखक रामू कुमार समय-समय की बात है , कुछ ना लागे हाथ !! आपन सब मुह फेर ले , दोसर देवे साथ !!

रफ्तार

            घोड़ा के पैर मे जंजीर बांध देने से  वो अपना रफ्तार नही भूलता !

उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे

  उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे !! इनकर सतरंगी रंग ! भरे दिल में उमंग !! नापे धरती से आसमां की दूरी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! इनकर काले पीले मूंछ ! लंबे सीधे-साधे पूंछ !! कभी दाएं कभी बाएं देखो मुड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! रंग रूप है निराले ! हवा इनको संभाले !! कभी कटे कभी छंटे कहीं जुड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! संघ लेके उड़े धागे ! कभी पीछे कभी आगे !! धागा ऐसे काटे जैसे कोई छुड़ी रे ! गिरी गिरी रे पतंग गिरी गिरी रे..!! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! गिरी गिरी रे पतंग गिरी गिरी रे..!!                                                ( लेखक रामू कुमार)

मॉडर्न पत्नी

  नई जनानी बड़ी सयानी ! काम काज में आना कानी !! सास करत है चूल्हा चौका ! ससुर घूमते बन कर बौका !! कैंची जैसी मुंह चलावे ! मॉल हॉल में नोट उड़ावे !! खाना इनकर मिले दुकाना ! ब्रेड पकौड़ी और मखाना !! शुबह शाम वह फोन चलावे ! लोल ऐंठ कर रील बनावे !! बन कर घूमे  झांसी रानी ! इनकर करनी देव न जानी !!                                          (लेखक रामू कुमार)

भालू आया भालू आया (हिंदी कविता)

  भालू आया भालू आया ! पेट फुला कर कालू आया!! काले काले बाल बढ़ाए ! झूम झूम कर नाच दिखाए !! सोहन मोहन सीता गीता ! लेकर आओ लाल पपीता !! पेड़ों पर चढ़ जाते भालू ! शहद चाव से खाते भालू !! मिलजुल कर अब पैसे लाओ ! कालू को सब खूब सजाओ !! बांध गले में घंटी माला ! रूठ न जाए भालू काला !!          भालू आया भालू आया,           पेट फुला कर कालू आया.....!                                                   ( लेखक रामू कुमार )

विषाद की चादर (चौपाई छंद)

  दिन पर दिन अब दुख की रेखा ! काहे क्षेत्र फैलावे हो !! अंतर मन में उपजे पीड़ा ! अक्षुजल नैयन बहावे हो !! राहें चलते बाट बटोही ! रुक रुक मोहे समझावे हो !! विपद् घड़ी में सगे सहोदर ! हर पल तोहे तड़पावे हो !! कलयुग में सब सुख के साथी ! दुख में नाता छोड़ावे हो !! दिन रात कुछो समझ न आवे ! सुंदर काया झुलसाबे हो !!                                         (लेखक रामू कुमार)

शंकर महिमा (चौपाई छंद)

डम डम डम डम डमरू बाजे ! भूत बेताल मिलजुल साजे !! गले बिराजे विषधर माला ! तन पर पहने मृग के छाला !! बैल बसहबा बने सवारी ! हरे विपद सब संकट भारी !! शीश जटा से निकली गंगा ! शीतल करती उनके अंगा !! नीलकंठ है नाम तुम्हारे! सब का जीवन तुही सम्हारे !! जय जय जय जय शंकर दानी ! महिमा तोहर देव बखानी !!                                      !!  लेखक रामू कुमार !!

सपनों की उड़ान- भाग 15/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 15) में आपका स्वागत है!                         !सुबह का समय! मीठी हवा पेड़ो को सहलाकर कर जगा रही थी!  सूर्य की  रोशनी ओस के बुंदो को मनी रूप दे रहा था! नंदू दरवाजे की तरफ देखते हुए बोलता है, अब हमें चलना चाहिए! शिखा- नाश्ता कर लीजिए फिर चले जाइएगा! नंदू- चाय पीते पीते तो सुबह हो गई', यदि नाश्ता करेंगे तो ना जाने कई दिन लगेंगे! दोनों जोर जोर से हंसने लगते हैं!हंसी की आवाज से सारा घर गूंज उठता है!इसी हंसी का सहारा लेते हुए नंदू अपने कमरे के तरफ चल पड़ता है!पूरी रात जागने की वजह से नींद नंदू को अकेले देखते ही दबोच लेता है!और उसे नींद महल की ओर लेकर रवाना हो जाता है!कुछ समय बीतने के बाद शिखा दौड़ती भागती नंदू के यहां पहुंचती है ,और जोर-जोर से दरवाजा खटखटाने लगती है !नंदू दरवाजा खोलता है!शिखा काफी घबराई हुई थी और शिसक रही थी!नंदू आश्चर्यचकित होकर पूछता है ,शिखा क्या हुआ क्यों रो रही हो?नंदू की आवाज सुनते ही सीखा और जोर जोर से रोने लगती है!नंदू पूरी तरह घबरा जाता है ,और सिखा कि हाथ पक...

सपनों की उड़ान- भाग 14/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 14) में आपका स्वागत है!                       (शाम का समय) आकाशीय बिजली भौतिक बिजली पर विजय प्राप्त कर लिया था! मोती समान बारिश की बूंद ,तमाम वातावरण को अपनी ओर आकर्षित कर रही  थी! नंदू..एकाएक उठ कर बैठ जाता है! और कमरे में  पसरा अंधेरा देख कर , बड़ी-बड़ी आंखें करके इधर उधर देखने, लगता है!  कुछ भी नजर नहीं आने पर !उसकी चेतना अथाह डरावनी समुंदर में गोता लगाने लगता है! तभी अचानक जोर की बिजली चमकती है!और कुछ समय के लिए सारा कमरा उजाला से भर जाता है!और जब तक वह कुछ देख पाता , फिर से अंधेरा हो जाता है!  उसके कलाई की घड़ी मे रेडियम होने की वजह से कुछ देर के लिए चमकते रहता है!वह समय देखता है!और उसी घड़ी के सहारे मोमबत्ती जलाता है!और फिर मन ही मन सोचता है !इतनी तेज तूफान में मैं सीखा के यहां कैसे जाऊं? और वह भी तो नहीं आ सकती हैं! वह इसी सोच मे डूबा रहता है तभी!अचानक दरवाजा खटखटाने की आवाज आती है!नंदू अपना हाथ पैर समिट कर चौकड़ी मारकर बैठ जाता है!फिर दोबारा दरवाजा खड़कती है!नंदू...

सपनों की उड़ान- भाग 13/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 13) में आपका स्वागत है! बरसाती धूप  पेड़ के पत्तों के बीच से झांक रहा था!कुछ चिड़ियों की टोली पेड़ के पत्तों पे जमे पानी के बुंदो  को अपने होठों से छू छू कर खेल रहा था!कभी-कभी एक साथ कई सारे बूंद नीचे गिर जाते थे!जिससे ऐसा प्रतीत होता था, मानो जोर की बारिश शुरू हो गई हो! शिखा-मन में सोचती है दोपहर हो गई लेकिन अभी तक नंदू खाना खाने नहीं आये !लगता है उनका तबीयत फिर से खराब हो गया है!एक घंटा बित गया लेकीन नंदू का कोई थाह पता नहीं ! कुछ देर इंतजार करने के बाद, जब नंदू नहीं आता है, तो वह एक टिफिन में रोटी, दूध, सब्जी रख कर, सर पे दुपट्टा रखती हुई  नंदू के क्वार्टर के तरफ निकल जाती है! वहां पहुंचकर दरवाजा खटखटाती है! नंदू-खाट पर पड़े-पड़े बोलता हैं, कौन हैं? शिखा- मैं हूं शिखा दरवाजा खोलीए, नंदू झटपट उठता है, अपना कपड़ा सही करता है, कुछ सामान वेसुधा स्थिति में पड़ होता है, उसे सही करता है, फिर दरवाजा खोलता है, चेहरे पर मुस्कान  लेकर अंदर आने के लिए कहता है! शिखा टीफीन नंदू को देती हुई बोलती है!  खाना खाने क्यों नहीं आऐ? नंदू- अभी...

सपनों की उड़ान- भाग 12/Sapno ki udaan hindi story

सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 12) में आपका स्वागत है! शाम का समय- आकाशीय खेत में तारे उग रहे थे,हवाएं गुमसुमा समा बांध चुकी थी,जुगनू अपने रोशनी के साथ,भोजन के तलाश में निकल चुके थे,!! नंदू अपने क्वार्टर में, खाट पर ऐसे लेटा था,जैसे कोई अजगर बड़ा जानवर निगलने के बाद,अचेत अवस्था में पड़ा हो! इधर -शिखा तरह-तरह की पकवान बनाकर , शबरी की भांति आंखें बिछाए बैठी थी!कर्मचारी ड्यूटी से छूटते ही,सब्जी लेने बड़े बाजार की तरफ निकल चुके थे!शाम अपना पोथी पत्रा रात को सौंप रहा था! शिखा मन में विचार करती हैं,क्यों न नंदू को बुला लाउँ अब, कौन सा दूर रहते हैं, दस मिनट में तो पहुंच जाऊंगी, यही सोचती हुई एकाएक उठ कर खड़ी हो जाती है! और नंदू के क्वार्टर के तरफ चल देती है!उसके मन में तरह-तरह के सवाल-जवाब उत्पन्न हो रहे थे, लेकिन सभी पे पर्दा डालती हुई आगे बढ़ती जा रही थी !उधर से कर्मचारी  सरपट भागते हुए आ रहे थे! रास्ते में शिखा को देखकर,अचंभित स्वर में पूछता है, शिखा कहां जा रही हो?शिखा आश्चर्यचकित  होकर अपने बापू के तरफ देखती है,जैसे किसी चोर को एकाएक पुलिस पीछे से पकड़ लिया  हो,कुछ देर ठहर...

सपनों की उड़ान- भाग 11/Sapno ki udaan hindi story

सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 11) में आपका स्वागत है! बाहर लगे पेड़ अभी तक बरस रहे थे!नमी ग्रस्त हवा ऐसे चल रही थी,जैसे कश्मीर से होकर आ रही हो !! कुछ समय  बाद, शिखा एक लोहे की रॉड और साथ में कुछ उपले लेकर आती है! नंदू के पास रखती हुई, ये लीजिए आग कम हो गया है, इसे डालकर तेज कीजिए!नंदू अपना सिर नीचे किए हुए बोलता है ठीक है,  नंदू का शर्मीला स्वभाव देखकर, शिखा हंसती हुई चली जाती है! और मन ही मन सोचती है, शर्माना तो हमें चाहिए लेकिन यह तो बिल्कुल उल्टा हो रहा है! नंदू ,अग्नि देव को जैसे ही खोराक बढ़ाता है, वैसे ही अग्निदेव अपने पूरे शक्ति के साथ, यौवन का रूप धारण कर लेते हैं! और नंदू के कपड़े से नमी को सोख लेते हैं! नंदू  कपड़ा बदल कर सोचता है, अब अपने क्वार्टर पे चलना चाहिए!लेकिन कठोर निर्णय लेने से पहले, उसकी चेतना एक बार शिखा से अनुमति लेने का सलाह मांगता है!यही सोचकर वह फिर अपना हाथ सेकने लगता है, और शिखा का  इंतजार करने लगता है! लेकिन शिखा खाना बनाने में इतनी व्यस्त थी, की इधर आने का नाम ही नहीं ले रही थी! नंदू मन ही मन सोचता है, क्यों न उसे आवाज देकर बता दूं कि...

सपनों की उड़ान- भाग 10/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 10) में आपका स्वागत है!   गेट से निकलते ही,,- आकाशीय बिजली, तमाम वातावरण को अपनी आगोश में समेट लेती है!कुछ देर के लिए यैसा प्रतीत होता है,जैसे एका-एक सूर्य अपने तेज रोशनी के साथ जग गया हो! दोनो एक दूसरे के सहारे, एक ही जगह पे सचेत दशा मे खड़े रहते हैं! रमेश बाबू--विनोद जी, जान पड़ता है तेज बारिश आने की संभावना है ,कुछ देर के लिए आप यहीं ठहर जाइए! कर्मचारी- ठहरने को तो ठहर जाते रमेश बाबू,लेकिन बिटिया घर पे अकेली है, डर रही होगी!अभी तो बूंदा-बांदी शुरू हुआ है,तेज होते होते मैं पहुंच जाऊंगा! इतना कहते हुए दोनों वहां से निकल पड़ते हैं!कर्मचारी अधेड़ उम्र से भी एक चरण आगे था!लेकिन चलने की गती जवान को भी मात दे रहा था!दोनों यैसे सरपट भागते जा रहे थे, जैसे किसी नदी का बांध टूट गया हो! अभी  कुछ दूर क्वार्टर बाकी ही था तभी आंधी की तेज झोंका, छाता लेकर  उड़ जाती है! और कुछ ही क्षणों में बारिश की बूंद,दोनों को अपने आगोश में समेट लेती है! कर्मचारी अपने दरवाजे पे पहुंचने से चार कदम पहले से ही शिखा को आवाज देता है! शिखा..ये शिखा.. !    ...

सपनों की उड़ान- भाग 9/Sapno ki udaan hindi story

सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 9) में आपका स्वागत है!  बादलों की गर्जना धीरे-धीरे बढ़ते जा रहा था! शायद बारिश आने की संदेश दे रहा था!  कर्मचारी- नंदू, शिखा डर रही होगी, अब मैं चलूंगा!  इतना कहते   हुऐ तनकर कर खड़ा हो जाता है! फिर नंदू की तरफ देखते हुए! अरे एक बात पूछना तो भूल ही गया , इस क्वार्टर का किराया कितना है! नंदू  किराया बताता है! कर्मचारी-मेरे बगल में  इससे सस्ता और बढ़िया क्वार्टर है!  यदि तुम चाहो तो बात किया जाए! नंदू-जी अंकल जी,  इससे बढ़िया होगा तो क्यों नहीं रहेंगे! कर्मचारी-तो फिर शुभ काम में देर किस बात की चलो मेरे साथ!  नंदू कर्मचारी के साथ चलने के लिए तैयार हो जाता है! नंदू मन ही मन सोचता है इतने दिनों बाद जा रहा हूं, शिखा के लिए कुछ लेकर जाना पड़ेगा!नहीं तो सोचेगी नौकरी भी लग गया फीर भी खाली हाथ आया है! नंदू-- अपने थैले से कुछ पैसे निकाल कर जेब में रख देता है! और फीर ! कर्मचारी के साथ चल देता है! नंदू रास्ते में मिठाई की दुकान देखकर,  मिठाई खरीदने लगता है! कर्मचारी- इसकी क्या जरूरत है ! नंदू बगैर जवाब दिए ,मिठाई...

सपनों की उड़ान- भाग 8/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 8) में आपका स्वागत है! चार माह बीत चुके थे,नंदू के माता पिता विषाद की चादर में धीरे-धीरे लिपटते जा रहे थे, इधर कर्मचारी को  नंदू की यादें झकझोर रहा था,और अंत मे उन्होंने निश्चय किया कि आज नंदू से मिलने जाऊंगा!  कर्मचारी, ड्यूटी से आते वक्त सीधे नंदू के क्वाटर की तरफ चल देता है!लेकिन वहां नंदू नहीं मिलता है!कॉलोनी के लोगों से पूछने पर पता चलता है की,सेहत सही नहीं रहने के कारण वह बाहर क्वार्टर लेकर रहता है!कर्मचारी निराश होकर एक व्यक्ति से पूछता है!आपको पता है कि वह कहां रहता है ! कर्मचारी का प्रश्न निरुत्तर होकर वापस उसी के पास लौट आता है!दूसरे दिन कर्मचारी ड्यूटी से आते वक्त  कंपनी के गेट पर रुक कर नंदू का इंतजार करने लगता है!सभी कर्मचारी छुट्टी होते ही एक-एक करके बाहर निकलने लगते हैं!लेकिन नंदू कहीं नजर नहीं आता है!कर्मचारी अनिश्चित दशा में कुछ पल के लिए वहीं खड़ा रहता है!तभी एक गार्ड आकर उससे पूछता है, किसका इंतजार कर रहे हैं !कर्मचारी  बोलता है नंदू को, कार्ड मुस्काते हुए बोलता है - नंदू आज छुट्टी पर है, आप कल आईऐगा, कर्मचारी...

सपनों की उड़ान- भाग 7/Sapno ki udaan hindi story

सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 7) में आपका स्वागत  है!  शाम का समय, कर्मचारी अपना ड्यूटी खत्म करने के बाद ,फिर उसी कंपनी के दरवाजे पर आता है, जहां नंदू काम पर लगा होता है! नंदू छुट्टी होने के पश्चात कंपनी के बाहर बने चबूतरे पर बैठकर कर्मचारी का राह देख रहा होता है,कुछ ही क्षणों में कर्मचारी उसके पास पहुंचता है!  नंदू-कर्मचारी को देखते ही वहां से उठकर खड़ा हो जाता है!और बड़ी ही उत्सुकता पूर्वक.बोल पड़ता है! अंकल जी कंपनी के तरफ से मुझे रहने और खाने का प्रबंध किया गया है ! कर्मचारी-मुस्कुराते हुए वाह तब तो सोने पर सुहागा हो गया! लेकिन कंपनी का क्वार्टर है कहां? नंदू अपने जेब से एक कार्ड निकाल कर कर्मचारी को देता है और बोलता है ये तो आप ही को मालूम होगा ,यह कहां पर है !कर्मचारी अपने जेब से चश्मा निकालते हुए उस कार्ड को ध्यान से पढ़ने लगता है! पढ़ने के बाद नंदू से बोलता है! चलो मेरे साथ ये तो पास में ही है!कुछ दूर चलने के बाद कंपनी का  क्वार्टर आ जाता है!कर्मचारी गार्ड को नंदू सौंपते हुए वहां से आंखों में आंसू लेकर अपने क्वार्टर की तरफ तेजी से चल देता हैं!नंदू दोनों हाथ...

सपनों की उड़ान- भाग 6/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 6) में आपका स्वागत है! सुबह का समय,, चिड़ियों की चहचहाहट सारे वातावरण में गूंज रही थी! सूरज बड़ी थाली के समान धीरे-धीरे ऊपर की ओर निकल रहे थे! कर्मचारी-नंदू को जगाता है! नंदूआंख मलते हुए उठता है, सीखा दरवाजे पर खड़ी होकर ब्रश कर रही थी,जब उसकी नजर नंदू पे पड़ता है,  बड़ा पजामा और कुर्ता देखकर खिलखिला कर हंस पड़ती हैं,नंदू शर्मा का सिर नीचे कर लेता है, कर्मचारी--नंदू जाओ फ्रेश होकर आओ,और कपड़े भी बदल लो,तुम्हारे कपड़े सूख गए होंगे,नंदू कपड़े बदल कर अपने आपको काफी हल्का महसूस कर रहा था,सुबह का नाश्ता करने के बाद कर्मचारी ,नंदू को लेकर बाहर की तरफ चल देता है!नंदू इधर-उधर ताकते हुए कर्मचारी के पीछे पीछे चलता रहता है!कुछ दूर चलने के बाद कर्मचारी एक बड़े से लोहे के दरवाजे के पास खड़ा हो जाता है!और फिर गार्ड रूम के तरफ बढ़ते हुए नंदू को वहीं ठहरने का अनुमति देता है!नंदू सिपाही के जैसे वही तन कर खड़ा हो जाता है!जैसे सीमा का रक्षा कर रहा हो!कर्मचारी  कर्मचारी ऑफिस में प्रवेश करता है,ऑफिस के अंदर एक वेटिंग हॉल बना होता है जिसमें कुछ- कुर्सियां लगी ...

सपनों की उड़ान- भाग 5/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 5) में आपका स्वागत है! क्वार्टर के अगल-बगल काफी पेड़ पौधे लगे थे!जो कि बारिश छूटने के बाद भी काफी समय तक टपकटी रहती थी!चांद खिला हुआ था,बारिश की बूंदे शीशे के समान चमक रही थी!हल्की हल्की हवा पेड़ों को ताजगी प्रदान कर रही थी, तभी एका एक दरवाजा खुलता है,कर्मचारी सीखा को डाटते हुए दरवाजा खोलने में कोई इतना समय लगता है! नंदू को अचानक अपने पिता जी का याद आ जाता है! वो भी मम्मी को इसी तरह डाटते थे! सीखा अपने बाबू जी के हाथ से छाता लेती हुई तपाक से पूछ  बैठती है यह कौन है! कर्मचारी बैगर जवाब दिये  हुए, बरामदे में लगे कील मे  अपना कुर्ता टांगनेन लगते हैं!शिखा जवाब न पाकर अपनी नाक सिकुड़ाती हुई चली जाती है!नंदू बाहर दरवाजे को पकड़कर  अछोप की तरह खड़ा रहता है! कर्मचारी--नंदू वहां खड़े क्यों हो , वो दरवाजा गिरने वाला नहीं है आओ बैठो यहां!नंदू हल्के मुस्कुराहट के साथ, बरामदे में लगे कुर्सी पर बैठ जाता है! कर्मचारी--शिखा वो शिखा...., शिखा--जी बाबू जी.., कर्मचारी -- थोड़ी सी चाय बना लो, कुछ ही छनो मे स्टॉप की आवाज ,सारे क्वार्टर में बैगर चैनल...

सपनों की उड़ान- भाग 4/Sapno ki udaan hindi story

सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 4) में आपका स्वागत है! शाम का समय'' बारिश अपने आने की सूचना बिजली के हाथ इस धरातल पर भेजती है! और देखते ही देखते कुछ ही क्षणों  में, आ धमकती है! कर्मचारी नंदू को देखता है, वह कब से वहीं बैठा रहता है! लगता है नसा में ये अपना स्टेशन काफी पीछे छोड़ आया है! नंदू के पास आकर पूछता है-- ऐ  लड़के तुम्हें कहां जाना है, कब से देख रहा हूं तुम यहीं पर बैठे हो! नंदू उठ कर खड़ा हो जाता है! और आंखों से आंसू का सहारा लेकर, बड़े ही निर्मोही भाव से बोलता है, अंकल मुझे खुद नहीं पता मुझे कहां जाना है! कर्मचारी अचंभित होकर बोलता है--तुम पागल हो क्या? नंदू बगैर बोले अपना मुंह नीचे कर लेता है! कर्मचारी को कुछ समझ मे नहीं आता है, असली माजरा क्या है? कर्मचारी मन ही मन सोचता है, क्यों न इसे पुलिस को दे दूं वही पूछताछ करेगा, ऐसे यह बताने वाला नहीं है! कर्मचारी जैसे ही कदम उठाता है, नंदू वैसे ही लपक कर कर्मचारी का पैर  पकड़ लेता है !, कर्मचारी सक पका जाता  है, और मन ही मन सोचता है, इसे कैसे पता कि मैं पुलिस के पास जा रहा हूं! लगता है यह जादूगर है! नंदू रोते हुए ब...