सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 9) में आपका स्वागत है! बादलों की गर्जना धीरे-धीरे बढ़ते जा रहा था! शायद बारिश आने की संदेश दे रहा था! कर्मचारी- नंदू, शिखा डर रही होगी, अब मैं चलूंगा! इतना कहते हुऐ तनकर कर खड़ा हो जाता है! फिर नंदू की तरफ देखते हुए! अरे एक बात पूछना तो भूल ही गया , इस क्वार्टर का किराया कितना है! नंदू किराया बताता है! कर्मचारी-मेरे बगल में इससे सस्ता और बढ़िया क्वार्टर है! यदि तुम चाहो तो बात किया जाए! नंदू-जी अंकल जी, इससे बढ़िया होगा तो क्यों नहीं रहेंगे! कर्मचारी-तो फिर शुभ काम में देर किस बात की चलो मेरे साथ! नंदू कर्मचारी के साथ चलने के लिए तैयार हो जाता है! नंदू मन ही मन सोचता है इतने दिनों बाद जा रहा हूं, शिखा के लिए कुछ लेकर जाना पड़ेगा!नहीं तो सोचेगी नौकरी भी लग गया फीर भी खाली हाथ आया है! नंदू-- अपने थैले से कुछ पैसे निकाल कर जेब में रख देता है! और फीर ! कर्मचारी के साथ चल देता है! नंदू रास्ते में मिठाई की दुकान देखकर, मिठाई खरीदने लगता है! कर्मचारी- इसकी क्या जरूरत है ! नंदू बगैर जवाब दिए ,मिठाई...
मैं अपनी विचारधारा, उन तमाम लोगों तक पहुंचाना चाहता हूँ । जो हमें एक नई दिशा की ओर अग्रसर करें। मैं अपनी कविता कहानी संवाद इत्यादि के माध्यम से , एक यैसा मंजील हासिल करना चाहता हूं जहां पहुंचकर हमें, अत्यंत हर्ष प्रतीत हो।