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     मैं रामू कुमार     ...

   आप तमाम भूमंडल वासियों तक. अपनी विचारधारा पहुंचाना चाहता हूं ,जो प्रकृति से ओतप्रोत हैं !जिसमें ना जाने कितने जीव शामिल हैं , मैं अपनी कहानी ,संवाद ,कविता ,नाटक, इत्यादी के माध्यम से उन तमाम सजीवों से रूबरू करवाना चाहता हूं ,जिससे बहुत से प्राणी अपरिचित हैं ,हमारे पर्यावरण में हो रही अनेकों कुप्रथाएं जो हमें रोज एक नई गलतियां करने को मजबूर करती हैं और हम जानते हुए भी यह गलत है ,,, लेकिन अनदेखा कर जाते हैं  -और उस दलदल में फंसते चले जाते हैं! जहां से चाहकर भी नहीं निकला जा सकता ?..                   

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