नई जनानी बड़ी सयानी ! काम काज में आना कानी !! सास करत है चूल्हा चौका ! ससुर घूमते बन कर बौका !! कैंची जैसी मुंह चलावे ! मॉल हॉल में नोट उड़ावे !! खाना इनकर मिले दुकाना ! ब्रेड पकौड़ी और मखाना !! शुबह शाम वह फोन चलावे ! लोल ऐंठ कर रील बनावे !! बन कर घूमे झांसी रानी ! इनकर करनी देव न जानी !! (लेखक रामू कुमार)
मैं अपनी विचारधारा, उन तमाम लोगों तक पहुंचाना चाहता हूँ । जो हमें एक नई दिशा की ओर अग्रसर करें। मैं अपनी कविता कहानी संवाद इत्यादि के माध्यम से , एक यैसा मंजील हासिल करना चाहता हूं जहां पहुंचकर हमें, अत्यंत हर्ष प्रतीत हो।