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संदेश

तड़प

कुछ सुखी लकड़ियों को चुन रखा हूं मै' जिन्दगी का कुछ खबर नही! ये दिल मचलता रहा कटी पतंगो की तरह' इसे भी अबतक सबर नही!               जमी पे गिरकर मुलाकात होगी धुलो से'                                  उठाने वाला कोई सहर नही!                कुचला जाएगा यहां रंगीन पांव से'                 ताड़ने वाला कोई भंवर नही!     कुछ सुखी लकड़ीयों को चुन रखा हूं मै.......               ( लेखक रामू कुमार)

आगाज़

आइए बैठकर कुछ बात किया जाए' दिले कशमकश को समाप्त किया जाए!        दूरियां नजदीकियां कुछ भी नहीं रहा'        अब एक नई मंजिल तलाश किया जाए! हर किसी को चाहिए रंगीन महफिले' आइए मुकम्मल इश्क की शुरुआत किया जाए!       कैद हो चुका था तन्हाई की जंजीरो में'        अब इन जंजीरों से आजाद किया जाए! कांटो से भरी गुलशन को रौंदा था हमने' मिलकर उन जख्मों से सवाल किया जाए!                 मैंखानों की प्यालो पर कुछ छाप छोड़े थे हमने'        आइए उन छापो को साफ किया जाए! उदासी की चादर ओढ़ा रखा था फूलों को'  आइए उसे हटाकर खुशमिजाज किया जाए!       मीट रही थी इबादत की लकीर मेरे हाथों से'         फिर से नई लकीरों का आगाज़ किया जाए! आइए बैठकर कुछ बात किया जाए' दिले कशमकश को समाप्त किया जाए!         (लेखक रामू कुमार)

अधूरे जज्बात

  कुछ बात अधूरी है' मुलाकात अधूरी है! दुनिया के नजरों में' तालुकात अधूरी है!              थोड़ी सी रहम कर दे'                    इस दिल को नरम कर दें!                     इस दिल से उस दिल तक'          विश्वास जरूरी है!     कांटो की शिकायत तो' गुलशन भी करते हैं!     मन मस्त मगन होकर' रहना मजबूरी है!                इस मरूस्थल दिल मे'             थोड़ी सी नमी दे दे!                तेरे साथ में चलने का'       मेरा मंजूरी है!                       (लेखक रामू कुमार)  

डिजिटल भाभी

जमाना बदल गया है भईया'जमाना बदल गया है भईया! भऊजी के इशारे पे नाचत है बड़का भईया' अपने पहीरे बनारसी साड़ी' मुन्ना के जिंस पहीराबेली! घर से बाहर बैग टांग के' छम छम पायल बजावेली! ब्यूटी पार्लर मौला हॉल में'खूब उड़ावे रुपईया' जमाना बदल गया है भईया'जमाना बदल गया है भईया! हर महीना में मोबाइल रिचार्ज' दुई घंटा में बैटरी डिस्चार्ज! उ इतना नेट चलावेली' नेट खत्म हो गईलापर' देवर से नेट जोड़वावेली! छन छन चूड़ी बजावे खातिर'खूब अईठेली कलाइयां! जमाना बदल गया है भईया'जमाना बदल गया है भईया! भात दाल  रोटी सब्जी' यूट्यूब से देख बनावेली! तेल साबुन कपड़ा लता' ऑनलाइन मंगवावेली! लाज शर्म सब पीछे छूटल'पूजा-पाठ लेवे अंगरईया! जमाना बदल गया है भईया'जमाना बदल गया है भईया! चार दिन में चम्मच टूटे' पाँच दिन में फोरली थाली! सास ससुर के समझईला पे' देवेली मूहछुटे गाली! इ कविता लिख -लिख के'शरमईले रामू भईया' जमाना बदल गया है भईया'जमाना बदल गया है भईया!                                             (लेखक रामू क...

अधूरी मुलाकात

  अभी कुछ दूर चला था मैं अभी कुछ दूर जाना है, हमें कहीं और जाना है हमें कहीं और जाना है, मिले थे रास्ते में वो सोचा कुछ बात कर लु, दूरियां दिल में ना रहे मुलाकात कर लु, अभी कुछ दूर चला था मैं अभी कुछ दूर जाना है,.... (लेखक रामू कुमार)

Mi life style

 हर घर में बस एक दुकान' माई लाइफ का अपना शान'     हर घर में समझाना है'      माई लाइफ अपनाना है दवा से लेकर खाद बीरो तक' सब यहीं मिल जाना है' सुंदर स्वास्थ्य रोग मुक्त' अब भारत को बनाना है'     देश के हर कोने कोने में'      यह संदेश पहुंचाना है'      माई लाइफ है सबसे उत्तम'      इनका सामान अपनाना है' मिलजुल कर सब काम करेंगे' माई लाइफ में नाम करेंगे' सुंदर सोच बनाना है' हर घर में बस एक दुकान' माई लाइफ अपनाना है'      हर सप्ताह में मेहनत का फल'      बगैर मांगे पाना है'      इन पैसों से अपने घर मे'      अमन शांति लाना है'

यादें

 होकर दूर हम तुमसे तुम्हारा फिक्र करते हैं भरी मेहफिल मे जाकरके तुम्हारा जिक्र करते हैं अपनी हर गजल और गीत में तुम्हें गुनगुनाता हूं तुम से हर जुड़ी वो  चीज अब पवित्र लगते हैं                  होकर दूर हम तुमसे तुम्हारा फिक्र करते हैं.. खुद को आईने में जब भी देखता हूं कभी उस आईने में भी तुम्हारा चित्र रहते हैं                  होकर दूर हम तुमसे तुम्हारा फिक्र करते हैं.. तुम्हारी हर पुरानी खत को मैं रोज पढ़ता हूं उन खत में तेरी हाथों का इत्र रहते हैं                  होकर दूर हम तुमसे तुम्हारा फिक्र करते हैं.. जब तन्हाई की जंजीर मेरे ओर बढ़ता है तेरा नाम लेकर हम वहां बेफिक्र रहते हैं                  होकर दूर हम तुमसे तुम्हारा फिक्र करते हैं.. Writer Ramu kumar

अकेलापन

दीया अकेला जल रहा,कमरा खाली खाली है! खिड़की के पल्ले झुल रहे,जैसे वो पेड़ के डाली है! मधुशाला में मधु छिड़कने  वाला देखो जाली है!! बोतल का ढक्कन लगा हुआ पर सारा बोतल खाली है!            दीया अकेला जल रहा.... फूल सींचने वाला माली कर्म हीन अनारी है! गुलशन का तो पता नहीं बस काटो का फुलवारी है! अंबर से समंदर तक राते काली-काली है! पंछी का तो पता नहीं बने भौतिक हरियाली है!              दीया अकेला जल रहा.... चेतना अधीर हुए अब झूठा प्रेम पुजारी है! सत्य अहिंसा  फीका पड़ा झूठ का पलड़ा भारी है! दीया अकेला जल रहा कमरा खाली खाली है! खिड़की के पल्ले झूल रहे जैसे वो पेड़ के डाली है! Writer Ramu kumar

तन्हा सफर

हुजूर यहां अब गुजारा नहीं,                          आशियाने में चांद सितारा नहीं,                              सूरज भी अकेला जलता रहा                                उनका भी तो कोई सहारा नहीं,                                                               हुजूर यहां अब गुजारा नहीं.. देखे हैं जो ख्वाबें हमने सदा                                  वैसा यहां कुछ ना नजारा नहीं,                                हर दिल अकेला मचलता रहा      ...

बदलते जमाना

देख जमाना बदल रहा है! उड़ते पंछी संभल रहा है! भौतिक रंग चढ़ गए सब पर प्रकृति की भी मचल रहा है!                   देख जमाना बदल रहा है! नदी सिमटकर नाला बन गई! नरम रुई अब भाला बन गई! नए रोग अब पनप रहा है देख जमाना बदल रहा है!                   देख जमाना बदल रहा है! संस्कृति भी हुई बेहोश! पड़ा जो उनपे भौतिक ओश! पुरानी चीजें कलप रहा है! देख जमाना बदल रहा है!                  देख जमाना बदल रहा है! उथल-पुथल है जीवन सबका! अमन चैन लुट गए हैं कब का! साधु संत भी सनक रहा है! देख जमाना बदल रहा है!                 देख जमाना बदल रहा है गुलशन में सुगंध कहां है! प्रकृति में आनंद कहां है! सत्य अहिंसा दबक रहा है देख जमाना बदल रहा है!             देख जमाना बदल रहा है..देख जमाना बदल रहा है!         ( लेखक रामू कुमार)