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दोहा

     रामायण के छंद मे , मिले राम अवतार !                 अंतर मन से जो पढ़े , मिले ज्ञान भंडार !!

                      ( लेखक रामू कुमार)
 

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उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे

  उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे !! इनकर सतरंगी रंग ! भरे दिल में उमंग !! नापे धरती से आसमां की दूरी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! इनकर काले पीले मूंछ ! लंबे सीधे-साधे पूंछ !! कभी दाएं कभी बाएं देखो मुड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! रंग रूप है निराले ! हवा इनको संभाले !! कभी कटे कभी छंटे कहीं जुड़ी रे ! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! संघ लेके उड़े धागे ! कभी पीछे कभी आगे !! धागा ऐसे काटे जैसे कोई छुड़ी रे ! गिरी गिरी रे पतंग गिरी गिरी रे..!! उड़ी उड़ी रे पतंग उड़ी उड़ी रे..!! गिरी गिरी रे पतंग गिरी गिरी रे..!!                                                ( लेखक रामू कुमार)

सपनों की उड़ान- भाग 2/Sapno ki udaan hindi story

  सपनों की उड़ान-हिंदी कहानी (भाग 2) मे आपका स्वागत है!  शाम का समय, बादलों के बीच से चांद झांक रहा था! खगोलीय पिंड आतिशबाजी के सामान चमचमा रहे थे! नंदू- आंगन में बिछी चटाई पर लेट कर आकाशीय सौंदर्य निहार रहा था!वह अपने आप को बादलों में सम्मिलित करना चाहता था!अपने आप को खुला  विचरण करने की कल्पना में डुबो  दिया था!उसके मन में नए-नए विचार उत्पन्न हो रहे थे! मन ही मन सोच रहा था!काश मैं भी औरों की तरह घूमता फिरता दोस्त बनाता खुली वादियों मे गुनगुनाता ! मालूम नहीं मेरे जीवन में ये तमाम खुशियां कब आएगा! अचानक प्रभा की आवाज - नंदू के मरुस्थलीय सपनों का दीवार चूर चूर कर देती  है! प्रभा- नंदू तुम्हें उसी वक्त बोली थी एक सलाई लेकर आओ लेकिन तुम तो तारे गिनने में व्यस्त हो! जल्दी जाओ दुकान बंद हो जाएगा! नंदू- ना चाहते हुए भी अपने बोझील शरीर को धरती से सहारा लेकर  उठता है, जैसे कोई वृद्ध व्यक्ति हो, नंदू- अपने मां से जो जला कटा शब्द सुना था,वही सब दुकान में जाकर उतारता है! नंदू दुकानदार से-सलीम भाई ,ओ सलीम भाई, सलीम खिड़की पे आकर - क्या हुआ नंदू क्यों चींख रहे हो, ...

पिस्टल मैन

 टीपू   - अपने गांव का सबसे अच्छा लड़का था ! वह अपने निश्चल स्वभाव से , सभी ग्राम वासियों को सम्मोहित कर लिया था ! अपने पूर्वजों द्वारा मिले संपत्ति के नाम पर, एक घर के अलावा उसके पास और कुछ भी नहीं था ! उसका व्यक्तित्व इतना अच्छा था ,की न कुछ होते हुए भी उसके शादी में ढेर सारा सामान मिला था ! सबसे अचंभे की बात तो तब हुई ,जब शादी के एक साल बीतने के बाद ,उसके पत्नी के मामा  बुलेट गाड़ी देने आए !  टीपू - कभी सपने में भी नहीं सोचा था , कि ऐसा होगा ! मामा को बढ़िया से स्वागत किया गया ! छः घंटे में चार दफा चाय तरह-तरह के पकवान बनारसी पान इत्यादि ! मामा -टीपू के पिताजी से विदा लेने का निवेदन  किये लेकिन असफल रहे ! काफी विनती के बाद शाम के समय जाने का अनुमति मिला ! शाम का समय  सूर्यास्त होने में कुछ ही पल बाकी थे ! गांव में लगे सोलर लाइट की लाल इंडिकेटर, साफ नजर आ रहा था ! किसी किसी घरों से कुकर की सीटी स्टीम इंजन की तरह आवाज कर रही थी ! टीपू - मामा को बुलेट पर बैठाकर रंगबाज की तरह, फटफटाते  हुए बस स्टैंड की तरफ छोड़ने चला ! गांव से बस स्टैंड की दूरी लगभग तीस...